ज़िंदगी

ज़िन्दगी हमेशा दो दिनों से मिलकर चलती है
पहला तुम्हारे लिए और दूसरा तुम्हारे खिलाफ
जिस वक़्त ये तुम्हारे लिए है तो खुद को सबसे ऊपर मत समझना
और जब ये तुम्हारे खिलाफ है तो सब्र करना क्योंकि दोनों ही दिन तुम्हारा इम्तेहान लेते हैं

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